हाथों में मासूम बच्चें व चेहरे पर चिंता की लकीरें, सौ किलोमीटर का सफर तय कर साईकिल से झज्जर पहुंचे प्रवासी
हाथों में मासूम बच्चें व चेहरे पर चिंता की लकीरें
सौ किलोमीटर का सफर तय कर साईकिल से झज्जर पहुंचे प्रवासी
लॉक डाउन के चलते प्रशासन ने शैल्टर होम पहुंचाया
हांसी से एमपी के लिए चार साईकिलों पर निकले थे प्रवासी मजदूर
झज्जर(राहुल चौहान) चेहरे पर चिंता की लकीरे और साईकिल पर सवार बेबसी के बीच गोद में बैठे मासूम बच्चें। यह नजारा था उन प्रवासी मजदूरों का जोकि सौ किलोमीटर का सफर तय कर बीती देर शाम हांसी से झज्जर पहुंचे। इससे पहले की वह अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए आगे बढ़ते,उन्हें झज्जर में ही रोक कर शैल्टर होम भेज दिया गया। चार साईकिलों पर सवार होकर यह प्रवासी मजदूरों का परिवार बुधवार की सुबह हांसी से मध्यप्रदेश के लिए निकले थे। हांसी में परिवार के साथ मेहनत-मजदूरी कर पालन-पोषण करने वाले इन प्रवासियों को उम्मीद थी कि कोरोना वायरस के चलते सरकार द्वारा लगाया गया लॉकडाउन शायद 14 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा। लेकिन जैसे ही लॉकडाउन का दूसरा चरण शुरू हुआ इनके सब्र का पैमाना भी छलक गया। श्रमिक परिवार के मुखिया वासूदेव के अनुसार वह जैसे-तैसे लॉकडाउन का दूसरा चरण भी हांसी में ही रहकर पार कर लेते। लेकिन अचानक उनके पैसे खत्म हो गए और मदद भी नहीं मिली। इसी के चलते उन्होंने अपनी साईकिलों पर 15 घंटें लगातार सौ किलोमीटर का सफर तय किया। अभी वह झज्जर पहुंचे ही थे कि उन्हें यहां पर रोक लिया गया। प्रशासन द्वारा इन्हें झज्जर की श्रीराम धर्मशाला में बने
शैल्टर होम में भेजा गया है। यहां उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा की गई है।
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